सफ़र ऐ मोहब्बत, गीतकार गुरप्रीत गुरी

सफ़र-ऐ-मोहब्बत पर, इक मुकाम आया,
खुले होंठ जब – जब तेरा नाम आया….

देखी आँखे जब तेरी गहरा समंदर था,
उठी जुल्फें जब जब , तो तुफान आया…..

दिल चाहता है देखूं…… सिर्फ तुम्हे देखूँ ,
इस कदर हैं ‘हालात, ये अंजाम आया….

हंसते हो कभी-कभी पर खूब हंस्ते हो,
वजह हो तुम मुझ पर ये इल्जाम आया….

बे-असर रहीँ सदा दवा, ऐ- इंग्लिश ,
मुस्कुराना ही आखिर तेरा काम आया…..

दर्द-ऐ-दिल गुरी…लिए फिरता रहा
मिले ज़ब तुम तो आराम आया …..

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