सफ़र-ऐ-मोहब्बत पर, इक मुकाम आया,
खुले होंठ जब – जब तेरा नाम आया….
देखी आँखे जब तेरी गहरा समंदर था,
उठी जुल्फें जब जब , तो तुफान आया…..
दिल चाहता है देखूं…… सिर्फ तुम्हे देखूँ ,
इस कदर हैं ‘हालात, ये अंजाम आया….
हंसते हो कभी-कभी पर खूब हंस्ते हो,
वजह हो तुम मुझ पर ये इल्जाम आया….
बे-असर रहीँ सदा दवा, ऐ- इंग्लिश ,
मुस्कुराना ही आखिर तेरा काम आया…..
दर्द-ऐ-दिल गुरी…लिए फिरता रहा
मिले ज़ब तुम तो आराम आया …..

